नव वर्ष

नव, नवल, नवीन, नया, नूतन,
पुलकित हृदयस्थल हर्षित मन।
स्वागत शुभ नवक्षण नव जीवन;
नव वर्ष का सबको अभिनन्दन॥

स्वच्छ  हरित  तृण  की  चादर,
स्वर्णिम अनुकोमल  है  अम्बर।
सुरभित  वसुधा   जैसे  चन्दन;
नव वर्ष का सबको अभिनन्दन॥

नव चाह, नवल मन ,नवल राह,
जीवन का सत्  सत् नव प्रवाह।
नव  गीत  सुनाते  हैं कण-कण;
नव वर्ष का सबको अभिनन्दन॥

नव  प्रेम  सुधा  रस  बरसाता,
नव ज्ञान प्लवित हो  मदमाता।
नव  खुशियों  से भरता आँगन;
नव वर्ष का सबको अभिनन्दन॥

गेंदा,  गुलाब,  चम्पक,  बेला ,
सजती  धरती  हर पुष्प खिला।
अब  महक  रहा  सारा  उपवन;
नव वर्ष का सबको अभिनन्दन॥

कहती "पण्डित" की स्वर लहरी,
इतना  लिख  दे मम उत्कीरणी।
मंगल  मय  वर्ष  अभय  नूतन;
नव वर्ष का सबको अभिनन्दन॥

                                     --दुर्गेश पण्डित

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