*🌼मैं लिखता हूँ सुनने के लिए🌼*
मैं लिखता हूँ सुनने के लिए शब्दों की सुन्दर बगिया से मधुर कुसुम चुनने के लिए, मैं लिखता हूँ सुनने के लिए।। मन अलिन्द ज्यों ज्यों उडता है, बगिया के रस भरे पुष्प से ; लिए रसों का संग्रह कर के , गंध नया सुंघने के लिए ।। मैं लिखता हूँ सुनने के लिए... बैठ निसर्ग की सदय क्रोड मे, अनुभव गम्य सृष्टि रचना को; शनैः शनैः अवशोषित करके, नश्वर जग भुलने के लिए ।। मैं लिखता हूँ सुनने के लिए... निज प्रज्ञा के रिक्त तन्तु में, मोती से वर्...