उत्कीरणी...
उत्कीरणी
जीवन की नव तरणी अए!
अए मम लेखनि!उत्कीरणी अए!
हे मम रागिनि! हे वणतूलिका!
मम नयनों की निर्झरणि अए !
अए मम लेखनि!उत्कीरणी अए!
मेरी अनुरागिनी!हे मम संगिनी!
मम जीवन की अनुचरणि अए!
अए मम लेखनि! उत्कीरणी अए!
हे मम बगिया की नवलतिका!
मम काव्यकला! उपमान नए!
अए मम लेखनि!उत्कीरणी अए!
मम हृदय हर्ष हे!हे मम प्रेमिका!
चञ्चल दृग का आलम्बन ए!
अए मम लेखनि! उत्कीरणी अए!
मम मान अए! सम्मान अए!
मेरी प्रतिभा का गान अए!
अए मम लेखनि! उत्कीरणी अए!
मम पितृ अए! मम मातृ अए!
मम भ्रातृ सखा,मम तनय जियें!
अए मम लेखनि! उत्कीरणी अए!
नव यौवन ए! नव जीवन ए!
इस "पण्डित" की तुम प्राणप्रिये!
अए मम लेखनि! उत्कीरणी अए!
जीवन की नव तरणि अए!
अए मम लेखनि! उत्कीरणी अए!
© दुर्गेश पण्डित
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